गणतंत्र दिवस परेड में शामिल न किए जाने को लेकर बीएसएफ ने जताया ऐतराज
हमारे देश की आजादी को 70 वर्ष से भी अधिक समय हो गया हैी अब हमारा देश अपने देश के संविधान के अनुसार चलता है। यह संविधान 26 जनवरी 1950 को लागू किया गया था। प्रत्येक वर्ष गणतंत्र दिवस के अवसर पर दिल्ली के लाल किले पर प्रधानमंत्री के झंडा फहराने के बाद भारत की सशस्त्र सेनाएं अपने सैन्य बल का प्रदर्शन करती हैं। मगर हाल ही में पाकिस्तान और बांग्लादेश के सीमा की सुरक्षा करने वाली बीएसएफ यानी सीमा सुरक्षा बल ने गणतंत्र दिवस परेड 2020 में शामिल न किए जाने को लेकर गृह मंत्रालय के सामने नाराजगी जताई है।
मंत्रालय से जारी की गई सूचना के मुताबिक कहा है कि 26 जनवरी परेड 2020 में केवल केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल, केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल, इंडिया तिब्बत पुलिस फोर्स और दिल्ली पुलिस के जवान ही हिस्सा लेंगे।
गणतंत्र दिवस परेड से बाहर किए जाने पर गृह मंत्रालय से जताई नाराजगी
दरअसल हाल ही में गृह मंत्रालय ने एक आधिकारिक आदेश जारी किया है। जिसमें गृह मंत्रालय की तरफ से कहा गया है कि अगले वर्ष होने वाले राजपथ पर मार्चिंग परेड में बीएसएफ अपने जवानों को ना भेजें। गृह मंत्रालय ने केवल बीएसएफ के ऊंट दस्ते और ऊंट सवार बैंड को राजपथ में होने वाली मार्चिंग परेड में हिस्सा लेने के लिए आमंत्रित किया है।
गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने अपना नाम सार्वजनिक न किए जाने की शर्त पर बताया कि सीमा सुरक्षा बल ने इस मुद्दे को गृह मंत्रालय के सामने उठाया है। उनका कहना है कि इस वर्ष भी गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान उसका हिस्सा होने के बाद ही बीएसएफ के मार्चिंग दस्ते को समय नहीं दिया गया। प्रत्येक वर्ष 26 जनवरी के दिन राज्य पथ पर भारत की विभिन्न सेनाओं द्वारा अपना शक्ति प्रदर्शन करते हुए परेड में हिस्सा लिया जाता है। पूरी दुनिया भारत की सैन्य ताकत को इस दिन देखती है।
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